डॉ. चतुर्भुज का जन्म बिहार में हुआ. इन्होंने अपना सारा जीवन हिंदी के माध्यम से नाट्य-लेखन, उसके प्रस्तुतीकरण, निर्देशन, मंचन और अभिनय के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। नाट्य-कला को डॉ. चतुर्भुज ने रोज़ी-रोटी से जोड़कर बेरोजगारों को नयी दिशा देने का कार्य किया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय,दरभंगा में एम.ए. स्तरपर 'नाट्यशास्त्र' को एक स्वतंत्र विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल कराया।
आकाशवाणी में निदेशक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वे वहां प्रथम नाट्य-शिक्षक के तौर पर ढाई साल तक सेवारत रहे,साथ ही, सेवानिवृत्ति के १० वर्षों बाद उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से पी. एच-डी. की डिग्री प्राप्त की, जिसका विषय था- 'भारत के प्रमुख नाटक और प्राचीन ग्रीक नाटक : एक अध्ययन'.
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