आकाशवाणी इलाहाबाद उन सौभाग्यशाली केन्द्रों में से एक है जहां पर अनेक साहित्यिक विभूतियां सदैव आकाशवाणी के लिए अपना समय निकालती थी ,चाहे महादेवी वर्मा जी रही हो या उपेन्द्र नाथ अश्क जी रहे हो या रामकुमार जी रहे हो ।
श्री जोशी जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है ,दिनांक 13 दिसम्बर 1903 को अल्मोड़ा-वर्त्तमान उत्तराखण्ड राज्य के मल्ला, दन्या में आपका जन्म हुआ था, आपके पिता चन्द्र बल्लभ जोशी तो संगीत प्रेमी थे ,जंगल विभाग की नौकरी थी ,किन्तु पुत्र इन सबसे दूर अल्प आयु में ही हाथ से छपने वाली -अल्मोड़ाअखबार और सुधाकर में से एक पत्र सुधाकर में अपनी लेखनी चला चुका था ,उसके मन में छटपटाहट होने लगी और वह घर से निकल गया । कलकत्ता जाकर शरद चन्द्र चट्टोपाध्याय से 1923 में मिले उन्होंने जोशी जी की प्रतिभा देख कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया । जोशी जी बनारस भी गये वहाँ काशी में 1918 से प्रकाशित हिन्दी गल्प माला सजनवां कहानी छपी ,उनकी कहानियों में -धूपरेखा,आहुति,खण्डहर की आत्माएं प्रसिद्ध थी । जीवनी साहित्य भी लिखा जिसमें रवीन्द्र नाथ,शरद व्यक्ति और साहित्यकार ,के अतिरिक्त आलोचना ग्रन्थ भी लिखे। जो साहित्य सर्जन ,साहित्य चिन्तन के रूप में जाने जाते है ।
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